14 अक्तू॰ 2012

अभिलेखों की प्रदर्शनी में दिखी शहीदों की जांबाजी

 

ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों द्वारा शुरू की गई बगावत से संबंधित तमाम दस्तावेजों की प्रदर्शनी में मौजूद छात्र-छात्राओं महिला महाविद्यालय में गुरुवार से शुरू तीन दिवसीय अभिलेख प्रदर्शनी में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों द्वारा शुरु की गई बगावत के तमाम दस्तावेज देखकर वह आवाक रह गईं।



ऐतिहासिक धरोहरों में क्रांतिकारियों ने अपनी जान हथेली में रखकर किस तरह से गोरों के खिलाफ ब्रिटिश हुकूमत को पत्र लिखे थे। वह आज भी ऐतिहासिकता के प्रमाण बने हुए हैं। पत्रों को देख छात्राएं शायद वीरांगना लक्ष्मी बाई जैसी महान योद्धा को स्मरण करने के लिए मजबूर हुईं तो कहीं कहीं गणेश शंकर विद्यार्थी, जोधा सिंह अटैया एवं ठाकुर दरियाव सिंह व बाबू वंशगोपाल की यादें भी तरोताजा होती रहीं। तीन दिनों तक चलने वाली इस प्रदर्शनी के जरिए आयोजक छात्राओं के दिलोदिमाग में इस बात की छाप डालने में कामयाब हो रहे हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन में रणबाकुरों ने किस तरह से अपना शौर्य प्रदर्शन किया। जिससे आने वाली युवा पीढ़ी भूल न सके।

संस्कृति विभाग द्वारा क्षेत्रीय अभिलेखागार इलाहाबाद के तत्वाधान में राजकीय महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय आंदोलन विषय पर गुरुवार से तीन दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। अपर जिलाधिकारी उदयराज सिंह ने फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता राजकीय अभिलेखागार की पूर्व निदेशक रेखा त्रिवेदी ने की और संचालन डॉ. बी.के.पांडेय ने किया। प्राचार्य डॉ. कमरनाज द्वारा अतिथियों  का स्वागत किया गया। इस क्रम में छात्राओं द्वारा स्वागत गीत की प्रस्तुति दी।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए एडीएम ने कहा कि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए ताकि वह सुरक्षित रह सकें। इतिहास विषय की विभागाध्यक्ष शोभा सक्सेना ने कहा कि इतिहास जानने के बहुत से साधन हैं लेकिन अभिलेख सबसे प्रमाणिक साधन हैं।  प्रर्दशनी में 70 से 80 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां प्रदर्शित की गईं। जिसमें पं.जुगुल किशोर, पंडित गणेश शंकर विद्यार्थी, बाबू वंश गोपाल सहित सेनानियों  के प्रमाणिक अभिलेख प्रदर्शित किए गए। इस अवसर पर डॉ. ओमप्रकाश अवस्थी, संग्राम सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अभिलेखागार विभाग की ओर से क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित अग्निहोत्री, प्राविधिक फारसी गुलाम सरवर, प्राविधिक इतिहास राकेश वर्मा और विनोद सोनकर एवं राजेश सोनकर उपस्थित रहे।


4 टिप्‍पणियां:
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  1. सुन्दर पहल! ऐसे प्रयास चलते रहें। नई पीढी को यह ध्यान रहे कि हमारी स्वतंत्रता और सुखी जीवन के लिये स्वाधीनता सेनानियों ने कितना त्याग किया है।

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  2. बहुत आभार आपका यह जानकारी शेयर करने के लिये.

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  3. आभार आपका.
    .
    .
    फिलहाल इतने से ही चला लीजिए.
    ही ही ही

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  4. शुक्र है सरकार को ये याद हैं और सुरक्षित रखे है

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