26 अग॰ 2018

Fatehpur Live : रेंह की कोख में छिपा संपदा-शिल्प का इतिहास, भगवान विष्णु की प्रतिमा बिखेर रही शोभा, पुरातत्व विभाग ने नहीं किया संरक्षण के प्रयास

 

फतेहपुर Live : रिंद व यमुना नदी के किनारे बसा छोटा सा गांव रेह अपनी कोख में युगों पुरानी संपदा और शिल्प समेटे है। पुरातत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस गांव में आज भी कलात्मक वैभव का प्रतीक बर्तन, ईंट व प्रतिमाएं मिलती हैं। हालांकि यह अब भी संरक्षण की बाट जोह रहा है। यहां मिली भगवान विष्णु की अष्टधातु की प्रतिमा को तो कीतिखेड़ा में स्थापित कर दिया गया लेकिन गांव को संरक्षित करने के प्रयास शून्य ही रहे।



द्वापर युग में राजा रेवत की राजधानी के रूप यह गांव नगर की तरह ही विकसित था। इतिहासकार कृष्णकुमार ने यहां पर मिली खंडित मूर्तियों, गोलाकार कुआं, ईंट की दीवारें, पकी मिट्टी के बर्तन का जिक्र करते हुए कहा था कि भग्नावेशों से यह अनुमान है कि यह मौर्य व शुंगकालीन होंगे। नदी किनारे का गांव होने के कारण कभी यह व्यापारिक केंद्र रहा होगा। इसके बाद भी पुरातत्व विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। गांव के रामसजीवन, पुष्पेंद्र आदि बताते हैं कि इस धरती में कई युगों का रहस्य है। पुरातत्व विभाग ने कभी इसे खोजने व सहेजने की कोशिश ही नहीं की। आज भी खोदाई करने पर खंडित मूर्तियां, प्राचीन बर्तन व कई आकार की पुरानी ईंटे यहां मिलती हैं अगर पुरातत्व विभाग इसको संरक्षित कर खोदाई कराए तो इतिहास की कई परतें सामने आ जाएंगीं।



■ कटान में मिली थी भगवान विष्णु की प्रतिमा
कई साल पहले टीले की कटान से मिली भगवान विष्णु की अष्टधातु की मूर्ति को सुरक्षा कारणों से भव्य मंदिर का निर्माण कराकर कीर्तिखेड़ा में स्थापित कर दिया गया है। इस प्रतिमा का अलग महत्व माना जाता है। कृष्णवर्णी चतभरुजी में भगवान विष्णु की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।



■ यवन राजा मेनैंडर का शिवलिंग
रेह का सर्वाधिक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण पाषाण प्रतिमा इंडो-ग्रीक राजा मेनैंडर का लेखांकित शिवलिंग है। इतिहासकार डा. चंद्रकुमार पांडेय ने बताया कि प्रयाग विश्वविद्यालय के प्रो. जीआर शर्मा ने भारत के पुरातात्विक मानचित्र में इस शिवलिंग को पाया तो इस पर शोध शुरू हुआ। भू सामधिस्थ शिवलिंग की ऊंचाई डेढ़ मीटर से अधिक पाई गई। कला की दृष्टि से शिवलिंग तीन भागों में बंटा हुआ है। नीचे का ब्रह्म भाग, बीच का विष्णु भाग और ऊपर का रूद्र भाग है। इसमें मौर्य कालीन ओपदार पालिश है।



★ रेह के इतिहास को संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा जाएगा। मैं खुद वहां कई बार गया हूं। यहां की प्राचीन मिली मूर्तियों व अन्य भग्नावेशों को संकलित कराया जाएगा। -  आंजनेय कुमार सिंह, जिलाधिकारी


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