14 जन॰ 2009

मलवां में संपन्न हुई कवि-सम्मलेन की अगली कड़ी ...

साहित्य समाज का दर्पण होता है। कुछ यही दर्शाते हुए मलवां के कवि सम्मेलन में साहित्यकारों ने वर्तमान परिवेश में आतंकवाद से निपटने के लिये जोश भरने का काम किया। रायबरेली के हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर मधुप श्रीवास्तव ने

हम उस देश के बेटे हैं दुश्मन को पछाड़ा करते हैं शेरों की क्या बात करें गीदड़ भी दहाड़ा करते हैं
पंक्तियों से खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने पाकिस्तान की ओर इशारा करते हुए इन पंक्तियों से देशवासियों के अन्दर जोश भी भरा।

स्वर्गीय मोहनलाल गुप्त जयंती के अवसर पर कवि सम्मेलन की अध्यक्षता साहित्य भूषण धनंजय अवस्थी ने मृदाल रचना की पक्ति के माध्यम से वीरता का आहवान किया।

भावों का अर्थ नयन कोर किया करते हैं, पांवों को गति नूतन लक्ष्य दिया करते हैं सदियों तक चलती है दुनिया जिन राहों में उनका निर्माण धीर, वीर किया करते हैं।
पंक्तियों के माध्यम से मनुष्य का जन्म लेकर कुछ करने का जज्बा भरा। लालगंज रायबरेली के अंजनी कुमार सिंह ने ग्रामीण जीवन को झलकाते हुए कहा कि
भीतर भरी है आग मगर होंठ क्यों सिये, उठता है इंकलाब नहीं, बोलो किसलिये।
इलाहाबाद के युवा कवि शैलेष गुप्त ने बदल गया है
आलम सारा बदल गये सब रंग, फीकी है मुस्कान यहां की लगी हुई है जंग।
कविता पढ़ी। खागा के अनिल तिवारी ने पग बढ़े तो बढ़े नवसृजन के लिये, हथगाम के शिवशरण बंधु ने
कंकर किसने फेंक दिया है पानी में, पानी का दिल कांप रहा है पानी में
पढ़कर सामाजिक व्यवस्था पर झकझोरा। आचार्य विष्णु शुक्ला ने फकीरों का इस दुनिया में कहीं घर नहीं होता कविता पढ़ी। युवा कवि समीर शुक्ल ने इक झगड़ा भवा गांव मइहां, जब भार जला सतुवाहिन का लोक भाषा की रचना से लोगों का मन मोहा। संयोजक नरेश गुप्त ने आत्म साधना से संभव है सेवा इस संसार की भक्ति रचना पढ़ी।

वरिष्ठ कवि शिवशरण सिंह अंशुमाली, तारकेश्वर बाजपेयी, डा।हरिप्रसाद शुक्ल अकिंचन, भइया जी अवस्थी, विनोद कुमार, श्रवण कुमार, संग्राम सिंह, गजराज गुप्त केहरि आदि ने विशिष्ट रचनायें प्रस्तुत कर स्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में रामप्रसाद गुप्त, रामभूषण सिंह, उमाशंकर त्रिपाठी, स्वयंवर सिंह, कमल नाथ, कमलमणि त्रिपाठी, भगवंत सिंह, राधेश्याम हयारण आदि रहे।

4 टिप्‍पणियां:
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  1. आतंकवाद के खिलाफ़ कविता समारोह वाह साहब वाह


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    आनंद बक्षी

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  2. प्रवीण त्रिवेदी जी बहुत सुंदर लगा आप का आज का यह लेख, काश आज भारत के हर शहर मै हो ऎसे कवि सम्मेलन ओर नोजवानो को देश प्रेम के बारे पता चले
    धन्यवाद

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  3. कवि सम्मेलन की अच्छी रिपोर्टिंग की है. आभार.

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