16 जन॰ 2009

अब यह बहाना नहीं चलेगा कि साहब दौरे पर गये हैं !!!

 

यूपी स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) संचार क्रांति का एक ऐसा माध्यम है जिससे कर लो दुनिया मुट्ठी में का सच साबित हो रहा है। एक वर्ष से इसका नेटवर्क एनआईसी तैयार करने में जुटा हुआ है। ब्लाकों में उपकरण भी लग गये कागजी कार्यवाही में स्वान केन्द्र शुरू भी हो गये, लेकिन इसका उपयोग कुछ भी नहीं हो पा रहा है। ब्लाकों में न तो सूचनायें अपडेट की जा रही हैं और न ही जिला मुख्यालय से ब्लाक की योजनाओं की समीक्षा हो पा रही है। हालांकि प्रत्येक ब्लाक में अब वेब कैमरे भी लगवाये जा रहे हैं। यहीं से बैठकर ब्लाक की मीटिंग करने के साथ पूरी गतिविधियों पर नजर रखने की इस व्यवस्था पर ब्लाक स्तर के अधिकारी ही पानी फेर रहे हैं।


सूचना एवं विज्ञान केन्द्र में
से चल रहा है। संचार क्रांति से सूचनाओं की पलक झपकते जानकारी के साथ एक जगह बैठकर मानीटरिंग करने की व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिये जिलाधिकारी सौरभ बाबू ने हर ब्लाक के स्वान केन्द्र में वेब कैमरे भी लगवाने केनिर्देश दिये हैं। बताते हैं कि वेब कैमरों की खरीददारी भी हो गयी है और ब्लाकों में लगाये भी जा रहे हैं। स्वान केन्द्र में इन्टरनेट कनेक्शन स्क्रीन के साथ सभी ब्लाकों के नेटवर्क को सेन्ट्रल सर्वर रूम यानी एनआईसी (NIC) से जोड़ दिया गया है। इसमें यह भी व्यवस्था है कि प्रतिदिन सुबह दस बजे यहीं से बैठकर जिलाधिकारी यह देख सकते हैं कि ब्लाक के कितने अधिकारी उपस्थित हुए हैं।

सभी योजनाओं व कार्यो की डाटाबेस फीडिंग और उसे सीधे नेटवर्क पर डालने की स्वान योजना को ब्लाक के अधिकारी ही किनारे लगाये हुए हैं। बताते हैं कि खजुहा, देवमई, बहुआ, ऐरायां जैसे ब्लाकों में तो महीनों डाटाबेस फीडिंग नहीं की जाती है। कई ब्लाकों में तो बिजली न आने का बहाना बनाकर स्वान केन्द्रों में ताला लटक रहा है।


बताते हैं कि तीनों तहसीलों को भी स्वान योजना से जोड़ा गया है। तेलियानी ब्लाक को सदर तहसील से और खजुहा को बिंदकी तथा ऐरायां को खागा तहसील से जोड़ने के साथ दस ब्लाकों में स्वान केन्द्र विकसित किये गये हैं। एक स्वान केन्द्र में तकरीबन पांच लाख रुपया खर्च हुआ है। इन केन्द्रों के माध्यम से यह भी व्यवस्था थी कि ब्लाक के सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना है और वह स्वयं केन्द्र में आकर अपनी योजना का डाटा वेबसाइड पर फीड करें, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। ब्लाकों के कर्मचारी कम्प्यूटर का की-बोर्ड तक नहीं छूना चाहते। एनआईसी के माध्यम से मानदेय पर आपरेटर जो लगाये गये हैं ब्लाक के अधिकारी उनसे केवल सूचनायें तैयार कराते हैं।

लगता है कि जब यह वेब कैमरा जैसे ही प्रभावी हो जायेंगे जिले से ही बैठकर किसी भी ब्लाक की मीटिंग ली जा सकती है और फिर यह बहाना भी नहीं चलेगा कि बीडीओ साहब दौरे पर गये हैं।

4 टिप्‍पणियां:
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  1. कामचोरी और मक्‍कारी किस सीमा तक की जा सकती है, यह आपकी इस पोस्‍ट से मालूम होता है। ईश्‍वर करे, वेब कैमरे अगले ही क्षण लग जाएं।
    बहुत ही ज्ञानवर्ध्‍दक सूचनाएं प्रस्‍तुत की हैं आपने।

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  2. योजना बनाने मै हम पहले ना० पर है, सिर्फ़ कागजी योजना, बाकी अमली तोर पर नही लगता है सारा पेसा हमेशा की तरह से बन्दर बांट मै गया.
    धन्यवाद

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  3. आप बगुल ध्यान ब्लागिंग पर लगाए रखिये -यह स्वान वान छोडिये आपको हमें इससे क्या मिलेगा अपना तो यह ब्राड बैण्ड जिंदाबाद !

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  4. वेब केमरे के भी विकल्प भी शीघ्र ही ढूँढ लिए जाएँगे.. सिस्टम इस कदर गंदा हो चुका है.. की नसो में फैल गया है अब तो.. ठीक होने में काफ़ी वक़्त लगेगा..

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